शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कैसे बढ़ाएँ | लक्षण और उपाय

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आज हम आपको इस आर्टिकल के जरिये बता रहें हैं कि, रोग-प्रतिरोधक क्षमता क्या हैं और रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण, लक्षण और इसका उपाय क्या हैं? रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए क्या खाना चाहिए? (How to Increase Immunity Power in Hindi) बच्चों में इम्युनिटी किस प्रकार बढ़ाएँ?

रोग-प्रतिरोधक क्षमता हमारे शरीर के वह सुरक्षा चक्र हैं जो बाहरी किसी इंस्फेक्शन, बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने में मदद करता हैं। रोग-प्रतिरोधक क्षमता हमारे जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता हैं। खासकर कोरोना (ओमीक्रॉन) काल में रोग-प्रतिरोधक क्षमता का महत्व और बढ़ गया हैं। अगर किसी इंसान के अंदर रोग-प्रतिरोधक क्षमता बिल्कुल ही नहीं हैं तो उस इंसान की जिन्दगी की गाड़ी एक दिन भी नहीं चल सकती हैं। 

रोग-प्रतिरोधक क्या हैं?

जब हम कहीं बाहर आते-जाते, घूमते-सोते या फिर किसी से बात करते हैं तो हर वक्त हमारा शरीर हजारों, लाखों बैक्टीरिया और वायरस से घिरा होता हैं। यहाँ तक कि जो हम खाते-पीते हैं, उसके अंदर भी होता हैं, फिर भी हमलोग जीवित रह पाते हैं क्योंकि हमारे पास रोग-प्रतिरोधक क्षमता (Immunity Power) होता हैं। रोग-प्रतिरोधक क्षमता ही हमारे शरीर को बैक्टीरिया और वायरस से बचाने में मदद करता हैं। रोग-प्रतिरोधक क्षमता कौशिका और प्रोटीन से मिलकर बनता हैं। रोग-प्रतिरोधक क्षमता को अंग्रेजी में इम्युन सिस्टम और इम्युनिटी पावर कहते हैं। रोग-प्रतिरोधक क्षमता को आयुर्वेद में ओज शक्ति कहते हैं। 

रोग-प्रतिरोधक क्षमता के प्रकार (Type of Immunity in Hindi)

Table of Contents

रोग-प्रतिरोधक क्षमता दो प्रकार के होते हैं, पहला इनेट रोग-प्रतिरोधक क्षमता (Innate Immunity) और दूसरा अक्वायर्ड रोग-प्रतिरोधक क्षमता (Acquired Immunity), इस रोग-प्रतिरोधक क्षमता को अडाप्टिव रोग-प्रतिरोधक क्षमता (Adaptive Immunity) भी कहते हैं।  

इनेट रोग-प्रतिरोधक क्षमता (Innate Immunity):-   

यह वह रोग-प्रतिरोधक क्षमता हैं जो हर कोई जन्म से ही लेकर पैदा होता हैं। हमलोग बाहर घूमते-फिरते, खेलते-कूदते और बात करते हर वक्त जीवाणु से घिरा होते हैं। ये जीवाणु खान-पान के माध्यम से भी हमारे शरीर के अंदर प्रवेश करता हैं। ये जीवाणु हमारे शरीर को नुकसान पहुँचाने से पहले यह रोग-प्रतिरोधक क्षमता उसे मार डालता हैं। यह रोग-प्रतिरोधक क्षमता हमारे शरीर के अंदर हमेशा रहता हैं। यह रोग-प्रतिरोधक क्षमता तेजी से काम करता हैं, लेकिन लम्बे समय तक काम करता हैं। 

अक्वायर्ड रोग-प्रतिरोधक क्षमता (Acquired Immunity):-

यह रोग-प्रतिरोधक क्षमता इनेट रोग-प्रतिरोधक क्षमता के बाद आता हैं। यह वह रोग-प्रतिरोधक क्षमता हैं जो हमारा शरीर बचपन से बुढ़ापा तक बीमारी से लड़ता हैं। यह रोग-प्रतिरोधक क्षमता बीमारी के अनुसार ऐंटीबॉडी तैयार करता हैं और उससे लड़ता हैं।

कमजोर रोग प्रतिरोधक के लक्षण

 

रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के लक्षण (Low Immunity Symptoms in Hindi)

  • अगर आपको बार-बार वायरल इंस्फेक्शन होता हैं जैसे:- सर्दी-खाँसी और जुकाम, यह रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने का संकेत हैं। अगर साल में 2 से 3 बार इस तरह की समस्या होती हैं तो, वह नॉर्मल माना जाता हैं।
  • अगर आपके शरीर में किसी भी प्रकार का घाव हैं और वह घाव भरने में बहुत अधिक समय लेता हैं तो, यह भी शरीर में रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने का लक्षण हैं।
  • अगर किसी का साल में 2 से 3 बार से अधिक गला खराब होता हैं तो, यह रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने का निशानी हैं।
  • आप जब सुबह सो के उठते हैं और अगर आप फ्रेश, चुस्ती-फुर्ती और ऊर्जावान महसूस नहीं करते हैं तो और सोने का मन करता तो, यह भी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने का लक्षण हैं।
  • अगर किसी को पेट से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या हैं जैसे:- ज्यादा गैस बनना, दस्त की समस्या और लगातार कब्ज की समस्या बना रहता हैं तो, यह रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होने का लक्षण हैं।
  • अगर आपको लगातार कब्ज की समस्या बना रहता हैं तो, हमारा शरीर का कुल 70% रोग-प्रतिरोधक क्षमता उस कब्ज जो बाहर निकालने में लगा देता हैं, जिससे हमारा शरीर में रोग-प्रतिरोधक क्षमता की कमी होने लगती हैं। हमारे पेट के अंदर अच्छे बैक्टीरिया होता हैं जो ख़राब बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करता हैं।
  • अगर आपको सर्दी-खाँसी, किसी वायरल इंस्फेक्शन और बुखार के कारण, अगर साल में 2 से 3 बार से ज्यादा एंटीबायोटिक खाने की जरूरत पड़ती हैं तो, आप समझ जाइयें कि आपका रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हैं।
  • अगर आपको ज्यादा थकान, कमजोरी, आलस, सुस्ती और ऊर्जा लेवल कम महसूस होता हैं तो, यह रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने का लक्षण हैं। छोटे बच्चों में ग्रौंथ की समस्या होना भी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने को दर्शाता हैं।
  • अगर आपके शरीर में कमर, घुटनों और कंधों में किसी भी प्रकार का दर्द होता हैं तो, यह भी कमजोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता की निशानी हैं।
  • अधिक मोटापा बढ़ना, यह भी कमजोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता का लक्षण माना जाता हैं।
  • अगर आपके त्वचा से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या हैं जैसे:- त्वचा में दाग-धब्बे, फोड़ा फुंसी होना, यह भी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने का लक्षण हैं। 

रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के क्या कारण हैं?

  • हमारी पेट, आंतें और लिवर से जुड़ी किसी भी प्रकार की समस्या के कारण भी हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती हैं।
  • रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना, यह हमारी खानपान पर भी निर्भर करती हैं। अगर आप ज्यादा बाहर का तला-भुजा, जंक फ़ास्ट-फ़ूड, कोल्ड-ड्रींक और पेकिंग युक्त भोजन का ज्यादा सेवन करते हैं तो, उससे भी हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती हैं।
  • अगर आपके शरीर में विटामिन C, विटामिन D और ज़िंक की कमी हो जाती हैं तो, उससे भी हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती हैं इसलिए हमें अपने खान-पान और भोजन के माध्यम से विटामिन C, D और ज़िंक युक्त आहार को जरूर शामिल करना चाहिए।
  • किसी प्रकार का नशा, स्मोकिंग और शराब की लत के कारण भी हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती हैं।
  • अगर आप लम्बे समय से ज्यादा तनाव और चिंता में रहते हैं तो, उससे भी हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती हैं इसलिए हमें ख़ुशी और आनंद में रहना चाहिए।
  • अगर किसी को लम्बे समय से कब्ज की समस्या हैं तो कब्ज के कारण भी हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती हैं।
  • अगर आप सही समय और अच्छी नींद नहीं लेते हैं तो उससे भी हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती हैं इसलिए हमें रात को 7 से 8 घंटा की नींद जरूर लेना चाहिए।
  • अगर आप पौष्टिक-युक्त भोजन का सेवन नहीं करते हैं तो उससे भी हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती हैं।
  • अगर आप रोज सुबह-सुबह योग-व्यायाम और कसरत नहीं करते हैं तो उससे भी हमारी शरीर का रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगता हैं।
  • अधिक चाय और कॉफी के सेवन करते से भी हमारी शरीर के रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगता हैं क्योंकि चाय और कॉफी में कैफीन होता हैं।
  • अगर आप अधिक मेदा और मेदा से बने खाद्य-पदार्थो का सेवन करते हैं तो, उससे भी हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगता हैं।
  • अगर आप पानी जरूरत मात्रा में नहीं पीते हैं तो, उससे भी हमारे शरीर का रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगता हैं इसलिए पानी जरूरत मात्रा में जरूर पियें।
  • मोटापा भी एक बहुत बड़ा कारण हैं, हमारा शरीर का रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर करने में, इसलिए हमें अपने शरीर का वजन सामान रखना चाहिए।

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रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के तरीके (How to Increase Immunity Power in Hindi)

जब रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की बात आती हैं तो, हमें एक बात जरूर पता होना चाहिए कि रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दुनिया में कोई दवा नहीं बनी हैं। रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की एक मात्र उपाय हैं और वह हैं अच्छी खान-पान और अच्छी लाइफ स्टाइल। 

उपवास:- रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए हमें उपवास करना बहुत जरूरी होता हैं। उपवास का मतलब हैं कि आप रात का खाना शाम 6 बजे से पहले खा लें और उसके अगले दिन सुबह 10 बजे के बाद ही नास्ता या भोजन करें। आप सुबह 10 बजे से पहले जूस का सेवन कर सकते हैं। या फिर दूसरा तरीका हैं कि, आप सप्ताह में कम-से-कम एक दिन आप नास्ता और लंच नहीं करें, सिर्फ एक बार रात का ही भोजन करें जल्दी करें। ऐसा करने से हमारी शरीर गंदगी अच्छे से साफ होती हैं। 

नास्ता:- आप अपने शरीर के रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए नास्ते में फल का ही सेवन करें। नास्ते में एक प्रकार का फल या कई प्रकार के फल का भी सेवन कर सकते हैं। फल पचने में हल्का होता हैं जो आंतें को अच्छी तरह से साफ करता हैं, जिससे कब्ज की समस्या नहीं होती हैं। 

अनाज युक्त भोजन:- रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढाने के लिए दिनभर में 1 बार ही अनाज-युक्त भोजन का सेवन करें। सुबह नास्ते में फल, दोपहर में अधिक-से-अधिक सलाद और सूप सेवन करें और शाम को अनाज-युक्त भोजन चावल, दाल और रोटी का सेवन करें। आप सलाद और सूप की जगह चावल, दाल और रोटी का सेवन कर सकते हैं और चावल, दाल और रोटी की जगह सलाद और सूप का सेवन कर सकते हैं। 

व्यायाम करना:- हमें अपने रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए रोज कम-से-कम 30 से 1 घंटे कसरत, व्यायाम और योग-प्रणायाम जरूर करें, इससे हमारी शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती हैं और हम स्वस्थ और ऊर्जावान रहते हैं। 

अच्छी नींद लेना:- अच्छी रोग-प्रतिरोधक क्षमता के लिए अच्छी नींद भी जरूरी हैं। रोज शांत माहौल में रात को 7 से 8 घंटे  गहरी नींद जरूरी हैं। 

कब्ज:- शरीर के अच्छी रोग-प्रतिरोधक क्षमता के लिए हमें कब्ज की समस्या को दूर रखना होगा। हमेशा अपने पेट को साफ रखें, इसके लिए अच्छी दिनचर्या का पालन करें। 

विटामिन :- रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए हमें सबसे ज्यादा विटामिन C और विटामिन D कि जरूरत पड़ती हैं और विटामिन D का सबसे अच्छा श्रोत हैं, सूर्य की रोशनी

प्रोटीन:- अपने शरीर के रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उस प्रोटीन का सेवन नहीं करें जो जानवर से मिलती हो जैसे:- दूध, मीट, मांस और अंडा, इन चीजों का सेवन कम-से-कम करना चाहिए। 

फल और सब्जियाँ:- अपने शरीर के रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए अधिक-से अधिक कच्चे फल और सब्जियों का सेवन करना चाहिए। 

धूप का सेवन:- अपने शरीर के रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और स्वस्थ रखने के लिए हमें रोज कम-से-कम 20 से 25 मिनट धूप में जरूर बैठे। 

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रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए क्या खाना चाहिए? (Immunity Power Increase Food in Hindi)

रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए हमें उन चीजों का सेवन अधिक मात्रा में करना चाहिए, जिन चीजों में विटामिन C भरपूर मात्रा में पाया जाता हैं। 

अगर फलों की बात करें तो सारे खट्टे फलों में विटामिन C भरपूर मात्रा में पाया जाता हैं। जैसे:- संतरा, अनानास, आंवला, मौसम्बी, कीवी, टमाटर, आम, निम्बू, अमरूद, मटर, लाल और हरी शिमला मिर्च, इन फलों में विटामिन C भरपूर मात्रा में पाया जाता हैं। इसके साथ-साथ पपीता, गाजर, चुक्कंदर, अनार, शकरकंद, एल्डरबेरी और थोड़ी मात्रा में मूँगफली में भी पाया जाता। 

फल और सब्जियों के अलावे रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए चिकन सूप का सेवन करना बहुत अच्छा होता हैं। 

रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने के घरेलू उपाय

रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए घरेलू उपाय (How to Increase Immunity Home Remedies in Hindi)

1. गुनगुने पानी में 5-6 तुलसी के पत्ते डाल दें और उसमें थोड़ी-सी अदरक, थोड़ी-सी दालचीनी, थोड़ी-सी निम्बू का रस और हल्की-सी गुड़ या शहद डालकर अच्छे से उबाल लें। ऐसा करने से पानी का गुण काफी बढ़ जाता हैं जो हमारे शरीर का रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बहुत कारगर होता हैं। इस काढ़ा को आप सुबह सेवन करें।इस काढ़ा को बनाने में आप पानी में सिर्फ कोई एक चीज भी डालकर बना सकते हैं। 

2. रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए हल्दी वाली दूध बहुत कारगर होता हैं। दूध की जगह आप गुनगुने पानी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे तो कच्ची हल्दी ज्यादा गुणकारी होता हैं, लेकिन कच्ची हल्दी की जगह आप हल्दी पाउडर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। गर्म दूध में हल्दी पाउडर या कच्ची हल्दी को डालकर अच्छी तरह से उबाल लें। जब दूध थोड़ा गुनगुना रह जाएँ तब इसका सेवन करें। ध्यान रखें कि हल्दी की मात्रा 4-5 ग्राम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए क्योंकि हल्दी की तासीर गर्म होती हैं। 

3. लहसून भी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बहुत कारगर होता हैं। लहसून को काढ़ा या चाय के रूप में सेवन करना अच्छा होता हैं। काढ़ा के लिए 2 कप पानी में लहसून के 5-6 कलियों को गुनगुने पानी में उबालकर इस काढ़ा को सुबह नास्ते के बाद पी सकते हैं और चाय के रूप सेवन करने के लिए 150 मिलीग्राम पानी में लहसून के 4-5 कलियों को डालकर अच्छे से उबाल लें, इस चाय में शहद और निम्बू का रस डालकर पी सकते हैं। 

4. गिलोय भी हमारे शरीर का रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए एक उत्तम ओषधि माना जाता हैं। गिलोय को आप तीन तरह से सेवन कर सकते हैं। पहला जूस, दूसरा पाउडर और तीसरा टेबलेट के रूप में। इन तीनों में सबसे अच्छा जो होता हैं वह हैं ताजे गिलोय को जूस के रूप में सेवन करना। 

5. ताजे गिलोय का सेवन आप इस प्रकार भी कर सकते हैं। गिलोय के लत से उनके कली को थोड़ी मात्रा में काटकर लें, उसे छोटी-छोटी टुकड़ों में कर लें उस टुकड़ों को रात में 200 से 250 मिलीग्राम पानी में डालकर छोड़ दें। सुबह उस पानी को छानकर खाली पेट सेवन करें। इस पानी को लगातार कम-से-कम 1 महीने और अधिक-से-अधिक 3 महीना तक सेवन कर सकते हैं। गिलोय रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के अलावे शुगर, कोलेस्ट्रॉल, लिवर, पाचन, बुखार, जोड़ों का दर्द और बालों का झड़ना में भी लाभकारी होता हैं।

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रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के योग-प्राणायाम (Immunity Booster Exercises at Home in Hindi)

जब आप रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए योग और प्राणायाम करते हैं तो पहले आप योग करें फिर प्राणायाम। 

अंजनिआसन योग:- अंजनिआसन रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बहुत आसान माना जाता हैं। साथ-ही और कई लाभ हैं जैसे:- फेफड़ों की कार्य क्षमता बढ़ाना, साइटिका, दिमाग को शांत करना और शरीर में चुस्ती-फुर्ती लाना। आप जितने भी योग-प्राणायाम करना करते हैं, वह करने का तरीका बिलकुल सही होना चाहिए और योग करते समय आरामदायक कपड़े पहिने। आपको जितने भी योगासन के बारे में बता रहें हैं, ये आसान कैसे किया जाता हैं, इसके लिए आप यूट्यूब वीडियो को जरूर फॉलो करें। (वीडियो देखें)

परिवृत जानूशीर्षासन:- ये योगासन भी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बहुत कारगर हैं। साथ-ही कई और  फायदे हैं जैसे:- लिवर, किडनी, मांसपेशियाँ, थकान, तनाव, अनिद्रा, सिरदर्द और पीठदर्द जैसे कई और समस्या में लाभ देती हैं। 

अधोमुख श्रवानासन:- ये योगासन भी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बहुत अच्छा होता हैं। साथ-ही-साथ और कई और लाभ हैं जैसे:- मांसपेशियाँ, थकान, तनाव, अनिद्रा, सिरदर्द, पीठदर्द, पाचन-तंत्र में सुधार, साइनस, ब्लड-प्रेशर और अस्थमा जैसे समस्याओं में लाभ देती हैं। 

बद्धकोणासन:- ये योगासन भी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बहुत मदद करती हैं। यह आसान तितली आसान का ही एक भाग हैं। साथ-ही इसके और कई लाभ हैं जैसे:- थकान, तनाव, अवसाद, खून का संचार, बाँझपन, ब्लड-प्रेशर और प्रोस्टेट और मूत्र संबंधित समस्याओं में लाभ। 

तितली आसान:- तितली आसान को ही बटर फ्लाई आसान कहते हैं। तितली आसान रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के अलावें और कई लाभ हैं जैसे:- अगर गर्भवती महिला तिलती आसान करती हैं तो उनको प्रसव के समय नॉर्मल डिलीवरी में काफी मदद करती हैं और साथ-ही-साथ पुरुषों में मूत्र और शीघ्रपतन की समस्या को ठीक करने में काफी मदद करती हैं। 

विपरीत करनी:- ये योगासन भी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बहुत मदद करती हैं। नाम से पता चलता हैं कि ये योगासन करने में उल्टा होगा। ये योगासन के कई और लाभ हैं जैसे:- ब्लड-प्रेशर, ब्लड-प्रेशर, मूत्र संबंधी, गठिया और कब्ज जैसे समस्याओं में लाभ देती हैं।

कपालभाति प्राणायाम:- रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए यह एक अच्छा प्राणायाम हैं। योगासन के बाद 10 से 15 मिनट कपालभाति जरूर करें। कपालभाति रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के अलावे पाचन को ठीक करना, पेट की मांसपेशियाँ ठीक करना, वजन कम करना, शरीर में खून का संचार सामान्य रखना और दिमाग को शांत रखने में मदद करता हैं। 

अनुलोम विलोम:- अनुलोम विलोम एक अच्छा प्राणायाम हैं रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए, इस प्रकिया में हमें दाएँ नाक को बंद करके बाएँ से छोड़ना होता हैं फिर दाएँ को बंद करके बाएँ से होता हैं, इस प्रक्रिया को बार-बार दोहराते हैं। इस प्राणायाम के और कई लाभ हैं जैसे:- शरीर को साफ करना, फेफड़ों को बल देना, ऑक्सीज़न की कमी को पूरा करना, तनाव, चिंता और सर्दी-खाँसी-जुकाम में लाभ देता हैं।

बच्चों की इम्युनिटी कैसे बढ़ाएँ? (How to Increase Immunity Power in Child in Hindi)

बच्चों में इम्युनिटी बढ़ाने से पहले, उनके कम इम्युनिटी होने के लक्षण को जानें। अगर कोई बच्चा बार-बार और जल्दी-जल्दी बीमार पड़ता हैं तो ये कमजोर इम्युनिटी होने का लक्षण हैं। जैसे:- बार-बार सर्दी-खाँसी और जुकाम होना, यह कमजोर इम्युनिटी का लक्षण हैं। 

  • बच्चों की इम्युनिटी बढ़ाने से पहले ध्यान रखें कि, बच्चों की खानपान और लाइफस्टाइल किस प्रकार हैं।
  • बच्चों की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए बच्चों को जरूरत मात्रा में सोना जरूरी हैं। बच्चों को दिन और रात सही समय पर सोने के लिए जरूर तैयार करें।
  • बच्चें को अधिक मात्रा में मीठा, जंक फ़ास्ट-फ़ूड और बाहर के खाने नहीं देना चाहिए। बच्चें कोई बात आसानी से नहीं मानते हैं, उनको उन्हीं के भाषा में मनाना पड़ता हैं।
  • हरे-पत्तेदार-सब्जियों को खिचड़ी और दलिया में डालकर उस दलिया और खिचड़ी को जरूर सेवन कराएँ।
  • बच्चें को विटामिन C युक्त फल और उनके जूस का सेवन जरूर कराएँ।
  • बच्चें को जरूरत मात्रा में पानी पीने को जरूर दें।
  • बच्चों को कम-से-कम 10-15 मिनट धूप का सेवन जरूर कराएँ, क्योंकि धूप में विटामिन D होता हैं जो हमारे इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करता हैं।
  • बच्चों को ड्राई-फ्रूट खाने को जरूर दें जैसे:- बादाम, काजू, किसमिस अखरोट, अंजीर, पिस्ता और मूँगफली। गर्मियों में भिगों कर दें और सर्दी में बिना भिगोंकर भी दें सकते हैं।
  • बच्चों को तुलसी, अदरक, लहसुन, हल्दी, दालचीनी और कालीमिर्च से बने काढ़ा का सेवन जरूर कराएँ। शिशु उम्र के बच्चें को जरूरत मात्रा में माँ का दूध बहुत जरूरी हैं और बच्चें को समय पर टिका और माँ को अपने खानपान में विटामिन C युक्त आहार को भरपूर मात्रा में लें।

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FAQ. (रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने से जुड़े सवाल और जबाब)

 

Q. इम्युनिटी बढ़ाने के लिए कौन-सा फल खाएँ?

Ans:- खासकर जितने भी खट्टे फल वह इम्युनिटी (रोग-प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाने के बहुत कारगर हैं। क्योंकि खट्टे फलों में विटामिन C भरपूर मात्रा में पाया जाता हैं। जैसे:- संतरा, अनानास, आंवला, मौसम्बी, कीवी, टमाटर, आम, निम्बू, अमरूद, मटर, काला अंगूर, लाल और हरी शिमला मिर्च। साथ-ही-साथ जिस फल का रंग लाल होता हैं, वह फल भी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में काफी मदद करती हैं। जैसे:- पपीता, गाजर, सेब, चुक्कंदर, अनार, शकरकंद, एल्डरबेरी।

Q. कौन-सा विटामिन रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता हैं। 

Ans:- हमारे शरीर में रोग-प्रतिरोधक क्षमता सबसे ज्यादा विटामिन C और विटामिन D बढ़ाता हैं, इसके अलावे ज़िंक, कार्बोहायड्रेट और एंटीऑक्सीडेंट भी मदद करता हैं रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में। 

Q. रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दवा 

Ans:- रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दुनिया में कोई दवा नहीं बनी हैं। रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की मात्र उपाय हैं, वह हैं विटामिन C युक्त आहार और रोज 15-20 धूप का सेवन करना। रोज सुबह योग-प्राणायाम करें और हमेशा खुश रहें। 

Q. कौन-कौन सी बीमारियाँ हमारे रोग-प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करती हैं?

Ans:- कई ऐसे बीमारियाँ हैं जो हमारे रोग-प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर हैं जैसे:- अस्थमा, एड्स, टाइप वन शुगर, एलर्जी, रूमेटाइड गठिया, ल्यूपस, लाइम की बीमारी और सीलिएक रोग। 

Q. हमें अपने शरीर में सामान्य रोग-प्रतिरोधक क्षमता के लिए रोज कितने विटामिन C की जरूरत पड़ती हैं?

Ans:- हमें प्रतिदिन सामान्य रोग-प्रतिरोधक क्षमता के लिए 0.2 ग्राम विटामिन C की जरूरत पड़ती हैं लेकिन खानपान के माध्यम से होनी चाहिए। अगर आप एक बड़े साइज का अमरुद खाते हैं तो 0.2 ग्राम विटामिन C मिल जाता हैं, अलावे 2 संतरा, 4 टमाटर, 3 आम और मुठी भर मटर खा लेते हैं तो 0.2 ग्राम विटामिन C मिल जाती हैं। नहीं तो सारे फल को मिक्स करके 300 ग्राम खा लेते हैं तो भी 0.2 ग्राम विटामिन C की पूर्ति हो जाती हैं। लेकिन जब हम बीमार होते हैं तो इसकी जरूरत 0.2 ग्राम से बढ़कर 0.6 ग्राम तक बढ़कर जाती हैं।
 
 
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