विटामिन D की कमी को कैसे पूरा करें | लक्षण और कारण क्या हैं?

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आज हम आपको बता रहें कि, विटामिन D की लक्षण, कारण और उपचार क्या हैं और विटामिन D (विटामिन D3) की कमी को पूरा कैसे करें। साथ ही विटामिन D की कमी से कौन-सा रोग होता हैं और विटामिन D के फायदे और नुकसान क्या हैं(How to Increase Vitamin D Levels Quickly in Hindi) हमारे शरीर में कई प्रकार के विटामिन पाएँ जाते हैं, उनमें से ही एक हैं विटामिन D, विटामिन D हमारे शरीर के लिए बहुत ही जरूरी पोषक-तत्व हैं। विटामिन D एक फैट-सॉल्युबल विटामिन हैं। विटामिन D हमारे शरीर में एक हार्मोन का काम करताहैं।

जिस प्रकार कैल्शियम का सीधा संबंध विटामिन D से होता हैं, उसी प्रकार विटामिन D का संबंध भी कैल्शियम के साथ होता हैं। विटामिन D कैल्शियम को पचाने में मदद करता हैं। विटामिन D के बिना अधूरा और कैल्शियम के बिना विटामिन D अधूरा माना जाता हैं। बहुत हद तक कैल्शियम और विटामिन D का काम एक ही होता हैं।

विटामिन D को सनशाइन विटामिन भी कहा जाता हैं। विटामिन D के कई श्रोत हैं लेकिन इसका मुख्य श्रोत धूप हैं। विटामिन D का बनना हमारे त्वचा के रंग पर निर्भर करती हैं। जब सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणें हमारे त्वचा में पड़ती हैं तो, हमारे त्वचा में जो कोलेस्ट्रॉल होता हैं, उनसे मिलकर हमारी त्वचा विटामिन D बनाती हैं। जिन लोगों के त्वचा के रंग काला होता हैं, उन लोगों के त्वचा में मेलेनिन तत्व अधिक होता हैं जो विटामिन D को बनने से रोकता हैं।
 
विटामिन D एक मात्र ऐसा विटामिन हैं जो हमारी शरीर बनाती हैं। जिन लोगों का त्वचा का रंग गोरा होता हैं, उन लोगों में मेलेनिन तत्व बहुत कम पाया जाता हैं, जिससे उनकी त्वचा आसानी से विटामिन D बना लेती हैं। उदाहरण के लिए अगर गोरे त्वचा वाले जितना विटामिन D 15 मिनट हैं बना लेगी, उतना ही विटामिन D काले त्वचा वाले 50 मिनट में बनाएँगी। पूरी दुनिया में लगभग 1 अरब लोगों में विटामिन D की कमी पायी जाती हैं। 
 
विटामिन D के लिए हमें सूर्य की किरणें बहुत महत्वपूर्ण होती हैं, क्योंकि लगभग 90% विटामिन D हमें सूर्य की धूप से मिलती हैं और 10% विटामिन D हमें खान-पान के चीजों से मिलती हैं। खोज में पाया गया हैं कि भारत में 80% लोगों में विटामिन D की कमी पायी गई हैं। फिर भी भारत के लोगों को विटामिन D आसानी से मिल जाती हैं, लेकिन यूरोप देश के लोगों को विटामिन D के लिए 12 महीने विटामिन D की दवाइयाँ खानी पड़ती हैं, क्योंकि वहाँ अक्सर 5-6 महीने लगातार धूप नहीं निकलती हैं। इसलिए वहाँ के लोग ज्यादा गोरे होते हैं।
 
विटामिन D के दो भाग होते हैं, एक विटामिन D2 और दूसरा विटामिन D3, जो विटामिन D3 होता हैं, वहीं काम का होता हैं और हमें विटामिन D3 की ही जरूरत पड़ती हैं। हम भी अपना विटामिन D की जाँच करते हैं तो हम अपना विटामिन D3 का ही जाँच करते हैं। विटामिन D3 की जाँच थोड़ी मंहगी होती हैं। लगभग 1500 रुपया के आसपास।
 
विटामिन दो प्रकार का होता हैं, एक फैट-सॉल्युबल और दूसरा वाटर-सॉल्युबल। विटामिन D एक फैट-सॉल्युबल विटामिन हैं जो हमारे शरीर के अंदर जमा होता हैं और शरीर के अंदर ज्यादा देर तक रहता हैं और जो वाटर-सॉल्युबल विटामिन होता हैं, यह हमारे शरीर के अंदर ज्यादा देर तक जमा नहीं रहता हैं। यह घुलनशील होता हैं, जिससे यूरिन के माध्यम से बाहर निकल जाता हैं।
 
विटामिन D के साथ-साथ विटामिन A, E और K भी फैट-सॉल्युबल विटामिन हैं।
 
जो विटामिन D2 होता हैं, उसे हम एग्रो कैल्सिफेरोल (Ergo Calciferol) भी कहा जाता हैं। एग्रो कैल्सिफेरोल विटामिन पोधेदार खाद्य-पदार्थ में पाया जाता हैं जैसे:- मशरूम में सबसे ज्यादा पाया जाता हैं और जो विटामिन D3 होता हैं, उसे कॉले कैल्सिफेरोल कहते हैं जो मांसाहारी भोजन में पाया जाता हैं जैसे:- सैल्मन, कॉड मछली, रेड मांस और अंडे का पीले भाग में ज्यादा पाया जाता हैं।

विटामिन D कम होने के लक्षण क्या हैं? (Vitamin D Symptoms in Hindi)