कोल्ड ड्रिंक पीने से होने वाले दुष्प्रभाव | फायदे और नुकसान

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आज हम आपको इस पोस्ट में बता रहें हैं कि, कोल्ड ड्रींक जैसे कोका कोला, पेप्सी, स्प्राइट, थम्स अप पीने के क्या फायदे और नुकसान हैं। (Cold Drink Side Effects in Hindi) कोल्ड ड्रींक एक प्रकार का पेय हैं। कोल्ड ड्रिंक को सॉफ्ट ड्रिंक के नाम से भी जाना जाता हैं। कोल्ड ड्रींक के तासीर गर्म होती हैं।

जब कहीं पार्टी,सादी और जश्न का माहौल रहता हैं तो, हमारे दिमाग में कोल्ड ड्रींक का नाम सबसे पहले आता हैं और हम इसे बड़े चाह के साथ भी पीते हैं। कोई सोख या मन को शांत करने के लिए पीते हैं तो कोई पियास बुझाने के लिए।  पियास बुझाने के लिए सबसे अच्छा विकल्प पानी हैं।

 

कोल्ड ड्रींक पियास बुझाने के लिए एक अच्छा विकल्प नहीं हैं। कोल्ड ड्रींक के फायदे ना के बराबर हैं और नुकसान बहुत ज्यादा हैं।कोल्ड ड्रिंक (सॉफ्ट ड्रिंक) के नाम पर हमलोग कोका कोला, पेप्सी कोला, स्प्राइट, माउंटेन डिउ, सेवन अप और थम्स अप पीते हैं। हमलोग जो कोल्ड ड्रींक पीते वह सारा पैसा विदेश चला जाता हैं। 

कोल्ड ड्रींक का अलग-अलग नाम, अलग-अलग आकर, अलग-अलग बोतल और अलग-अलग दाम पर बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं। यह स्वाद में मीठा और खरा होता हैं। कोल्ड ड्रींक बनाने वाली सारी कम्पनीयाँ विदेश की हैं। कोल्ड ड्रिंक हमारे शरीर की जरूरत की चीज नहीं हैं। कम्पनी को एक बोतल कोल्ड ड्रींक बनाने में लगभग 1 रुपया का लागत लगता हैं और कम्पनियाँ इसे 10 से 12 रुपया में बेचती हैं।

कोल्ड ड्रींक के बारे में गलतफेमियाँ 

लोगों को अक्सर लगता हैं कि, कोल्ड ड्रींक पीने के बाद जो ढकार आते हैं तो, उसे लगता हैं कि उनका गैस शरीर से बाहर निकल गया हैं, मजा आ गया अब अच्छा लग रहा हैं। (Misconceptions About Cold Drinks) लेकिन ये लोगों का गलतफेमियाँ हैं। ऐसा होता हैं कार्बोनेटेड वाटर के कारण, कोल्ड ड्रींक में कार्बन डाइऑक्साइड मिलाया जाता हैं, इसलिए जब हम कोल्ड ड्रींक पीते हैं तो वह ढकार और गैस के माध्यम से बाहर निकलता हैं। 

जैसा कि जब हम कोल्ड ड्रींक का बोतल खोलते हैं तो, खोलते ही वह झाक की तरह बाहर निकलने लगता हैं, ऐसा होता हैं कार्बन डाइऑक्साइड के कारण, कोल्ड ड्रींक में कार्बन डाइऑक्साइड गैस मिलाया जाता हैं। पानी में कार्बन डाइऑक्साइड नहीं मिलाया जा सकता हैं, लेकिन जब ये कोल्ड ड्रींक वाले विदेशी कम्पनियाँ आएँ तो, ये कारनामा कर दिखाएँ। ये मशीनों के जरिये पानी में कार्बन डाइऑक्साइड मिलाया जिसे हम कार्बोनेटेड वाटर कहते हैं और ऐसे हम कोल्ड ड्रींक के रूप में पीते हैं।

कोल्ड ड्रींक पीने से हमारे शरीर में क्या होता हैं?

कोल्ड ड्रींक के 1 घंटे बाद हमारे शरीर में असर दिखाना शुरू करती हैं। खोज कर्ताओं से पता चला हैं कि, जब हम 350 ML कोल्ड ड्रींक पीते हैं तो तुरंत आपके शरीर में 10 चम्मच चीनी चली जाती हैं। यह चीनी की मात्रा आपके दिनभर के जरूरत के बराबर होती हैं। इतनी चीनी एक बार में लेने पर शरीर अक्सर उलटी कर देती हैं, लेकिन कोल्ड ड्रींक पीने से ऐसा कुछ भी नहीं होती हैं। इसकी एक वजह हैं और वह यह हैं कि कोल्ड ड्रींक में फॉस्फोरिक एसिड मिलाया जाता हैं जो कोल्ड ड्रींक के मिठास को कम कर देता हैं। 
 
कोल्ड ड्रींक पीने के 20 मिनट बाद हमारे शरीर में ब्लड शुगर की मात्रा तेजी से बढ़ जाती हैं। शरीर में इंसुलिन का बहाव तेजी से होने लगता हैं और इसे नियंत्रण करने के लिए लीवर अतिरिक्त प्रयास करता हैं और ऐसा करने के लिए लीवर शरीर को फैट में बदलने लगता हैं। 
 
कोल्ड ड्रींक में कैफीन भी होता हैं। कोल्ड ड्रींक पीने के लगभग 40 मिनट बाद हमारे शरीर में कैफीन का असर दिखने लगता हैं। जिससे आँखों की पलक फैलने लगता हैं। आपकी नींद गायब हो जाती हैं और आलस दूर जाती हैं। इस समय ब्लड-प्रेशर भी बढ़ जाती हैं। इसे नियंत्रण करने के लिए लीवर शरीर में और शुगर छोड़ने लगता हैं।
 
कोल्ड ड्रींक पीने के 40 मिनट बाद शरीर में डोपामाइन नामक कैमिकल्स की मात्रा बढ़ने लगती हैं। डोपामाइन दिमाग को ख़ुशी देने वाली प्रक्रिया को चालू कर देती हैं, जिससे आपको अच्छा महसूस होता हैं। हेरोइन ड्रग्स भी इसी तरह काम करती हैं। 
 
कोल्ड ड्रींक पीने के लगभग 1 घंटे बाद कोल्ड ड्रींक में महजूद फॉस्फोरिक एसिड, कैल्शियम और ज़िंक जैसे पोषक तत्वों को शरीर के छोटी आंत में भेज देता हैं। जिससे आपको पेशाब के लिए जाना पड़ता हैं। इस तरह आपके शरीर कोल्ड ड्रींक के जरिये पहुँचा हुआ सारा पानी शरीर से बाहर निकल जाता हैं।